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Thursday, November 9, 2017

डॉक्टरों की कमी को देखते हुए डीएम ने कस ली कमान, समय निकाल करते हैं मरीजों का मुफ्तइलाज

आज ज़्यादातर लोग पैसा और पॉवर आने के बाद दूसरों को हीन भावना से देखने लगे हैं। यहाँ तक की जो पद दूसरों की सेवा के लिये होता है उसे लोग बस अपने मेवा के लिए इस्तेमाल करने लगे हैं। पद पाते ही लोग अपने कर्तव्यों को भूल अपनी जिम्मेदारियों से अपना दामन बचाते नज़र आते हैं। लेकिन इसी भीड़ में कुछ ऐसे लोग अभी भी मौजूद हैं जो अपने निजी स्वार्थों व लाभों को छोड़ लोगों की सेवा को अपना धर्म मानते हैं।

आज कल लोगों को खुद के निज़ी चीजों से फुरसत नही हैं, वो जिस पेशे में होता है उसे भी सही ढंग से पूरा नहीं कर पाता। पर एक ऐसा आईएएस ऑफिसर भी है जो उत्तराखंड के चम्पावत ज़िले में जिलाधिकारी के पद पर तैनात होकर अपने कर्तव्यों को पूरा तो कर ही रहा है साथ ही साथ लोगों का मुफ्त इलाज़ भी करता है। दरअसल आईएएस डॉक्टर इकबाल अहमद नें 2009 में कर्नाटक के कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज, मैंगलोर से एमबीबीएस की पढ़ाई की व अपनी डिग्री प्राप्त की। लोगों के प्रति सेवा भाव के कारण उन्होंने आईएएस अधिकारी बनने का फैसला लिया। डिग्री प्राप्त करने के 1 साल बाद ही 2010 में उन्होंने आईएएस की परीक्षा पास कर ली।


आईएएस इकवाल यूँ तो चम्पावत के जिलाधिकारी जैसी बड़ी ज़िम्मेदारी को तो निभा ही रहे थे पर ज़िले में डॉक्टरों की कमी और उनके खुद डॉक्टर होने के कारण उन्होंने खाली समय में मरीजों को देखने का फैसला लिया। हालाँकि उनको इसके लिए 7 साल का लंबा इंतज़ार करना पड़ा। क्योंकि उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई कर डिग्री तो प्राप्त की थी पर कभी डॉक्टरी को पेशे के तौर पर नहीं अपनाया था। अतः उनके पास कोई औपचारिक पंचीकरण नहीं था।

लेकिन काफी इंतजार के बाद उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण की मंजूरी मिलने से उन्होंने खाली समय में मरीजों को देखना शुरू कर दिया है। वे खाली वक्त में मरीजों का इलाज करके न केवल लोगों की सेवा कर रहे हैं बल्कि दूसरे डॉक्टरों के लिए एक सीख भी बन रहे हैं जो अपने कर्तव्यों को भी ठीक से पूरा नहीं करते। डॉक्टर अहमद के इस पहल से डॉक्टरों के ऊपर का दबाव तो कुछ कम होगा ही साथ ही उनकी डॉक्टरी की पढ़ाई भी बेकार नहीं जाएगी।

चूँकि डॉक्टर अहमद के ऊपर पूरे जिले की बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है, लेकिन फिर भी वे वक़्त निकाल कर हर सुबह 1 घंटे सरकारी अस्पताल में बतौर डॉक्टर अपनी मुफ़्त सेवाएँ देते हैं। डीएम डॉ. इकबाल का कहना है कि उन्होंने अपने ज्ञान के सदुपयोग का एक प्रयास किया है। डॉक्टरों की कमी को देखते हुए उन्होंने मरीजों का इलाज करने का फैसला किया।

आपको आंकड़े की सुनें तो शायद आपको अंदाज़ा हो जाएगा कि पूरे उत्तराखंड में डॉक्टरों की कितनी कमी है। प्राप्त आकड़ों के अनुसार पूरे राज्य में लगभग 60 प्रतिशत डॉक्टरों की कमी है। जहां जरूरत 2,700 डॉक्टरों की है वहां केवल 1000 डॉक्टर ही उपलब्ध हैं।

ऐसी स्थिति में आईएएस डॉ. इकबाल के इस मानवीय कदम की जितनी सराहना की जाए, कम है। यदि डॉ. इकबाल की तरह देश का हर एक नागरिक अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाए तो एक ऐसे राष्ट्र का निर्माण होगा जहाँ हर कोई खुशहाल होगा।

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